
स्मृतिकण
Smritikan
Bhagwati Charan Verma
3 verses · ~15 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
Loading the archive
MM · XXVI

3 verses · ~1 min
अब तो नींद नहीं आएगी देख सिरहाने याद तुम्हारी हमने तो रिश्ता बोया था प्यार न जाने कब उग आया कब सींचा कब हरा हो गया कैसे कर दी शीतल छाया अब इस दिल को कौन संभाले ना कांधा ना बांह तुम्हारी
कब जाना था साथ बंधे तो दूर-दूर हो अलग चलेंगे सातों कसमें खाने वाले दो बातों तक को तरसेंगे आधी रातें घनी चाँदनी आँगन सूना मौसम भारी
दुनिया छोटी है, सुनते थे दूर न कोई जा पाता है समय लगा कर पंख, कहा था पल भर में ही उड़ जाता है पर पल भी युग बन जाता है नहीं पता थी यह लाचारी
इति

Paired Painting
Nala and Damayanti in the Forest
Open the viewer →
If this held you
Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ab To Neend carries.