
उस शाम वो रुख़सत का समा
Us Shaam Vo Rukhsat Ka Sama
Ibn-e-Insha
6 verses · ~11 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

7 verses · ~1 min
दिन भरि गाछक छाँह जकाँ क्यो संग चलय अभिराम साँझ परैत बरैए मन मे दीप जकाँ एक नाम ।
बरिसत कहियो वन-पाँतर चेतन मेघ क जलधार एक चिरायु तृषा सँ जीवित ई जलहीन इनार
स्नेह क स्वाति-विंदु ले' भटकल चातक चारू धाम।
राति-विराति पाँखि तोरै अछि मौन क सोनचिरै भोरे सिङरहार तर अगबे दूभि-अछत झहरै
फूल क वाण अनिल संधानय मारय ठाम-कुठाम।
पुरना काँपी मे गीत क सङ देखि मयूर क पाँखि शापित यक्ष क कथा सुमिरि भरि आयल दूनू आँखि
आर कते दिन शीतलहरि चलतै ई जानथि राम।
इति

Paired Painting
Damayanti and Her Maidservant
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Deep Jaka Ek Nam carries.