
और तो कोई बस न चलेगा
Aur To Koi Bas Na Chalega
Ibn-e-Insha
5 verses · ~12 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Karuna
Aur To Koi Bas Na Chalega Hijr Ke Dard Ke Maron Ka
Ibn-e-Insha5 verses · ~1 min
और तो कोई बस न चलेगा हिज्र के दर्द के मारों का| सुबह का होना दूभर कर दें रस्ता रोक सितारों का|
झूठे सिक्कों में भी उठा देते हैं अक्सर सच्चा माल, शक्लें देख के सौदा करना काम है इन बंजारों का|
अपनी ज़ुबां से कुछ न कहेंगे चुप ही रहेंगे आशिक़ लोग, तुम से तो इतना हो सकता है पूछो हाल बेचारों का|
एक ज़रा सी बात थी जिस का चर्चा पहुंचा गली गली, हम गुमनामों ने फिर भी एहसान न माना यारों का|
दर्द का कहना चीख उठो दिल का तक़ाज़ा वज़'अ निभाओ, सब कुछ सहना चुप चुप रहना काम है इजाज़त-दारों का|
इति

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Savitri, emblematic of ideal womanhood
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Aur To Koi Bas Na Chalega Hijr Ke Dard Ke Maron Ka carries.