№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Jatayu Vadham

Karuna

माँ के पँख नहीं होते

Man Ke Pankh Nahin Hote

Divik Ramesh
2 min read 9 versesमाँmotherपंख

9 verses · ~2 min

माँ के पंख नहीं होते कुतर देते हॆं उन्हें होते ही पॆदा खुद उसी के बच्चे ।

माँ के पंख नहीं होते । - लगभग गाती और रोती थी माँ ऎसा ही कुछ भले ही शब्द न रहे हों हूबहू न रहा हो लहजा भले ही हूबहू ।

पर जब-जब पिटती थी माँ माँ गाती थी और रोती थी चिपका लेती थी हमें और रोती थी और-और रोती थी जोर-जोर से भी -

माँ के पंख नहीं होते कुतर देते हैं उन्हें होते ही पैदा खुद उसी के बच्चे ।

माँ के पंख नहीं होते । माँ बकती गालियाँ - हरामजादा मर क्यों नहीं जाता लुगाई पर ही चलता है जोर

पड़ेंगे एक दिन कीड़े देख लेना पड़ेंगे एक दिन कीड़े टूटेंगे हाथ-पाँव । पर हमें कुछ समझ नहीं आता

वहाँ कोई होता भी नहीं सिवाय हमारे और माँ के कसे हुए । तब भी माँ बकती गालियाँ और रोती और गाती-

माँ के पंख नहीं होते कुतर देते हॆं उन्हें होते ही पॆदा खुद उसी के बच्चे ।

माँ के पंख नहीं होते । जिनके बच्चे नहीं होते कि बचे हैं जिनके पंख भी । क्या कहेंगी उनके बारे में सिमोन बुआ दादी?

इति

Divik Ramesh

The Poet

दिविक रमेश

Divik Ramesh

Jatayu Vadham

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Jatayu Vadham

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Man Ke Pankh Nahin Hote carries.