№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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King Shantanu Meets Ganga and Devavrata

Shanta

सागर से मिलकर

Sagar Se Milkar

Bhawani Prasad Mishra
2 min read 12 versesसाधारणordinaryसम्पन्न

12 verses · ~2 min

सागर से मिलकर जैसे नदी खारी हो जाती है तबीयत वैसे ही

भारी हो जाती है मेरी सम्पन्नों से मिलकर व्यक्ति से मिलने का

अनुभव नहीं होता ऐसा नहीं लगता धारा से धारा जुड़ी है एक सुगंध दूसरी सुगंध की ओर मुड़ी है

तो कहना चाहिए सम्पन्न वयक्ति वयक्ति नहीं है वह सच्ची कोई अभिव्यक्ति नहीं है

कई बातों का जमाव है सही किसी भी अस्तित्व का आभाव है

मैं उससे मिलकर अस्तित्वहीन हो जाता हूँ दीनता मेरी

बनावट का कोई तत्व नहीं है फिर भी धनाड्य से मिलकर मैं दीन हो जाता हूँ

अरति जनसंसदि का मैंने इतना ही अर्थ लगाया है अपने जीवन के समूचे अनुभव को इस तथ्य में समाया है

कि साधारण जन ठीक जन है उससे मिलो जुलो

उसे खोलो उसके सामने खुलो वह सूर्य है जल है

फूल है फल है नदी है धारा है सुगंध है

स्वर है ध्वनि है छंद है साधारण का ही जीवन में आनंद है!

इति

Bhawani Prasad Mishra

The Poet

भवानीप्रसाद मिश्र

Bhawani Prasad Mishra

King Shantanu Meets Ganga and Devavrata

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King Shantanu Meets Ganga and Devavrata

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