
वस्तुत
Vastutah
Bhawani Prasad Mishra
9 verses · ~15 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

1 verses · ~1 min
वस्तुतः मैं जो हूँ मुझे वहीं रहना चाहिए यानी वन का वृक्ष खेत की मेड़ नदी की लहर दूर का गीत व्यतीत वर्तमान में उपस्थित भविष्य में मैं जो हूँ मुझे वहीं रहना चाहिए तेज गर्मी मूसलाधार वर्षा कड़ाके की सर्दी खून की लाली दूब का हरापन फूल की जर्दी मैं जो हूँ मुझे अपना होना ठीक ठीक सहना चाहिए तपना चाहिए अगर लोहा हूँ हल बनने के लिए बीज हूँ तो गड़ना चाहिए फल बनने के लिए मैं जो हूँ मुझे वह बनना चाहिए धारा हूँ अन्तः सलिला तो मुझे कुएँ के रूप में खनना चाहिए ठीक जरूरतमंद हाथों से गान फैलाना चाहिए मुझे अगर मैं आसमान हूँ मगर मैं कब से ऐसा नहीं कर रहा हूँ जो हूँ वही होने से डर रहा र्हूँ
इति

Paired Painting
Landscape with Oak Tree
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Main Jo Hoon carries.