
आइये इक पहर यहीं बैठें
Aaiye Ik Pahar Yahin Baithen
Amitabh Tripathi ‘Amit’
6 verses · ~19 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
Loading the archive
MM · XXVI

15 verses · ~2 min
मुझे अफ़सोस है या कहिए मुझे वह है जिसे मैं अफ़सोस मानता रहा हूँ
क्योंकि ज़्यादातर लोगों को ऐसे में नहीं होता वह जिसे मैं अफ़सोस मानता रहा हूँ
मेरा मन आज शाम को शहर के बाहर जाकर और बैठकर किसी
निर्जन टीले पर देर तक शाम होना देखते रहने का था
कारण-वश और क्या कहूँ सभा में जाने की विवशता को मैं शाम को
शहर के बाहर नहीं जा पाया न चढ़ पाया
इसलिए किसी टीले पर देख नहीं सका होती हुई शाम
और इसके कारण जैसा लग रहा है मन को उसे मैं अब तक
अफ़सोस ही कहता रहा हूँ लोगों को एक तो ऐसी
इच्छा ही नहीं होती होती है तो उसके पूरा न होने पर
उन्हें कुछ लगता नहीं है या जो लगता है उसे वे अफ़सोस
नहीं कहते मैं आज विजन में किसी टीले पर चढकर
देर तक होती हुई शाम नहीं देख पाया जाना पड़ा एक सभा में
इसका मुझे अफ़सोस है या कहिए मुझे वह है
जिसे मैं अफ़सोस मानता रहा हूँ!
इति

Paired Painting
Landscape at Sunset
Open the viewer →
If this held you
Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Mujhe Afsos Hai carries.