
श्यामला
Shyamala
Pratibha Saxena
9 verses · ~27 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

5 verses · ~2 min
आज माँझी ले चलो उन निर्जनों में, किसी पग की चाप से आगे वनों में ले चलो उस तट बिना पहचानवाले, जहां कोई आ नहीं पाये, पता ले.
जिस जगह, संध्या-सुबह चुपचाप आयें, रात्रियाँ आ मौन ही फिर लौट जायें, जहाँ कोई प्रश्न उठ पाये न आगे, जिस जगह, बस मौन का ही राग जागे.
चलो अब कुछ काल वहीं व्यतीत कर लें यहँ से कुछ भी बताये-बिन निकल लें दूर इतनी यहाँ की किरणे न आयें, यहाँ की यादें वहाँ तक जा न पायें.
पार सबको कर, चलो ऐसी दिशा में, इन तटों से दूर हो, कुछ दिन बिताने ले चलो उस ओर कोई द्वीप होगा, वहाँ से आकाश बहुत समीप होगा.
चलो मेरे साथ, चाहे लौट आना, यहँ से बस कर चलो कोई बहाना. ले चलो उन दूरियों तक जहाँ कोई भी न जाये, या कि उन गहराइयों में जहाँ कोई डूब जाये!
इति

Paired Painting
Sunset on the Backwaters
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Nirjanon Mein carries.