№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Mahabharata Scene with Pandavas

Shanta

अपने आपमें

Apne Aapmein

Bhawani Prasad Mishra
2 min read 17 versesसमयtimeबीमारी

17 verses · ~2 min

अपने आप में एक ओछी चीज़ है समय चीजों को टोड़ने वाला

मिटाने वाला बने- बनाये महलों मकानों देशों मौसमों

और ख़यालों को मगर आज सुबह से पकड़ लिये हैं मैंने

इस ओछे आदमी के कान और वह मुझे बेमन से ही सही

मज़ा दे रहा है दस – पंद्रह मिनिट सुख से बैठकर अकेले में

मैंने चाय भी पी है लगभग घंटे – भर नमिता को जी खोलकर पढाई है गीता लगभग इतनी ही देर तक

गोड़ी हैं फूलों की क्यारियाँ बाँधा है फिर से ऊंचे पर

गिरा हुआ चमेली का क्षुप और

अब सोचता हूँ दोपहर होने पर बच्चों के साथ

बहुत दिनों में बैठकर चौके में भोजन करूंगा

हसूंगा बोलूंगा उनसे जो लगभग सह्मे- सह्मे से

घुमते रहते हैं आजकल मेरी बीमारी के कारण और फिर सो जाऊंगा दो घंटे समय अपने बस -भर इस सबके बीच भी

मिटाता रहा होगा चाय बनाने वाली मेरी पत्नी को

गीता पढने वाली मेरी बेटी को चमेली के क्षुप को

और मुझको भी मगर मैं इस सारे अंतराल में

पकड़े रहा हूँ इस ओछे आदमी के कान और बेमन से ही सही

देना पड़ा है उसे हम सबको मज़ा.

इति

Bhawani Prasad Mishra

The Poet

भवानीप्रसाद मिश्र

Bhawani Prasad Mishra

Mahabharata Scene with Pandavas

Paired Painting

Mahabharata Scene with Pandavas

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Apne Aapmein carries.