
उदास तुम
Udas Tum
Dharamvir Bharati
4 verses · ~21 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

8 verses · ~1 min
अधूरे मन से ही सही मगर उसने तुझसे मन की बात कही
पुराने दिनों के अपने अधूरे सपने तेरे क़दमों में
ला रखे उसने तो तू भी सींच दे उसके
तप्त शिर को अपने आंसुओं से
डाल दे उस पर अपने आँचल की छाया क्योंकि उसके थके – मांदे दिनों में भी उसे चाहिए एक मोह माया
मगर याद रखना पहले-जैसा उद्दाम मोह
पहले -जैसी ममत्व भरी माया उसके वश की नहीं है ज़्यादा जतन नहीं है ज़रूरी बस उसे इतना लगता रहे
कि उसके सुख-दुःख को समझने वाला यहीं -कहीं है!
इति

Paired Painting
Woman Worshipping the Serpent
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Adhure Hi carries.