№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Varini

Shringara

उदास तुम

Udas Tum

Dharamvir Bharati
2 min read 4 versesसुन्दरbeautifulउदासी

4 verses · ~2 min

तुम कितनी सुन्दर लगती हो जब तुम हो जाती हो उदास! ज्यों किसी गुलाबी दुनिया में सूने खँडहर के आसपास मदभरी चांदनी जगती हो!

मुँह पर ढँक लेती हो आँचल ज्यों डूब रहे रवि पर बादल, या दिन-भर उड़कर थकी किरन, सो जाती हो पाँखें समेट, आँचल में अलस उदासी बन! दो भूले-भटके सान्ध्य-विहग, पुतली में कर लेते निवास! तुम कितनी सुन्दर लगती हो जब तुम हो जाती हो उदास!

खारे आँसू से धुले गाल रूखे हलके अधखुले बाल, बालों में अजब सुनहरापन, झरती ज्यों रेशम की किरनें, संझा की बदरी से छन-छन! मिसरी के होठों पर सूखी किन अरमानों की विकल प्यास! तुम कितनी सुन्दर लगती हो जब तुम हो जाती हो उदास!

भँवरों की पाँतें उतर-उतर कानों में झुककर गुनगुनकर हैं पूछ रहीं-‘क्या बात सखी? उन्मन पलकों की कोरों में क्यों दबी ढँकी बरसात सखी? चम्पई वक्ष को छूकर क्यों उड़ जाती केसर की उसाँस? तुम कितनी सुन्दर लगती हो ज्यों किसी गुलाबी दुनिया में सूने खँडहर के आसपास मदभरी चाँदनी जगती हो!

इति

Dharamvir Bharati

The Poet

धर्मवीर भारती

Dharamvir Bharati

Varini

Paired Painting

Varini

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Udas Tum carries.