№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Indian Riverbank Landscape with Figures and Shrine

Shringara

संध्या आज प्रसन्न है

Sandhya Aaj Prasann Hai

Chandrasen Virat
2 min read 7 versesसंध्याeveningप्रसन्न

7 verses · ~2 min

पहले शिशु के जन्म-दिवस पर शकुर भरी कोई माँ पलना झुलवाए फूली-सी वैसे ही बस संध्या आज प्रसन्न है

पश्चिम के गालों पर लाली दौड़ गई चित्रकार सूरज अब शयनागार चला जाते जाते शृंगों को दे दिए मुकुट चंचल लहरों के मुख पर सिंदूर मला

पहले कश्ती को उतारते सागर में मछुअन तिलक करे माँझी को फूली-सी वैसे ही बस संध्या आज प्रसन्न है

गोधूली क्या केसर घुली समीरण में गाय रंभायी, गूँजे शंख शिवालों से विहग रामधुन गाते लौटे नीड़ों को रामायण के स्वर फूटे चौपालों से

मनचीते हाथों से माँग सिंदूर भरे कोई दुलहन डोली बैठे फूली-सी वैसे ही बस आज संध्या प्रसन्न है

निकला संध्या-तारा दिशा सुहागन है शलथ तन पर ममता का आँचल डाल रही आँगन बालक जुड़े कहानी सुनने को नई बहू दीवट पर दीवा बाल रही

बिना सूचना आ दृग परदेसी बिरहन अपना प्रिय पहचाने फूली-सी वैसे ही आज संध्या प्रसन्न है

इति

Chandrasen Virat

The Poet

चंद्रसेन विराट

Chandrasen Virat

Indian Riverbank Landscape with Figures and Shrine

Paired Painting

Indian Riverbank Landscape with Figures and Shrine

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sandhya Aaj Prasann Hai carries.