№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Portrait of a Lady

Shringara

गज़ल हो गई

Ghazal Ho Gayi

Chandrasen Virat
1 min read 10 versesगज़लGhazalभावना

10 verses · ~1 min

गज़ल हो गई

याद आयी, तबीयत विकल हो गई. आँख बैठे बिठाये सजल हो गई.

भावना ठुक न मानी, मनाया बहुत बुद्धि थी तो चतुर पर विफल हो गई.

अश्रु तेजाब बनकर गिरे वक्ष पर. एक चट्टान थी वह तरल हो गई.

रूप की धूप से दृष्टि ऐसी धुली. वह सदा को समुज्ज्वल विमल हो गई.

आपकी गौरवर्णा वदन-दीप्ति से चाँदनी साँवली थी, धवल हो गई.

मिल गये आज तुम तो यही जिंदगी थी समस्या कठिन पर सरल हो गई.

खूब मिलता कभी था सही आदमी मूर्ति अब वह मनुज की विरल हो गई.

सत्य-शिव और सौंदर्य के स्पर्श से हर कला मूल्य का योगफल हो गई.

रात अंगार की सेज सोना पड़ा यह न समझें कि यों ही गज़ल हो गई.

इति

Chandrasen Virat

The Poet

चंद्रसेन विराट

Chandrasen Virat

Portrait of a Lady

Paired Painting

Portrait of a Lady

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ghazal Ho Gayi carries.