№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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The Meeting of Bhima and Hidimbi

Shringara

अनुभूति

Anubhuti

Sumitranandan Pant
1 min read 6 versesअनुभूतिexperienceमधु

6 verses · ~1 min

तुम आती हो, नव अंगों का शाश्वत मधु-विभव लुटाती हो।

बजते नि:स्वर नूपुर छम-छम, सांसों में थमता स्पंदन-क्रम, तुम आती हो, अंतस्थल में शोभा ज्वाला लिपटाती हो।

अपलक रह जाते मनोनयन कह पाते मर्म-कथा न वचन, तुम आती हो, तंद्रिल मन में स्वप्नों के मुकुल खिलाती हो।

अभिमान अश्रु बनता झर-झर, अवसाद मुखर रस का निर्झर, तुम आती हो, आनंद-शिखर प्राणों में ज्वार उठाती हो।

स्वर्णिम प्रकाश में गलता तम, स्वर्गिक प्रतीति में ढलता श्रम तुम आती हो, जीवन-पथ पर सौंदर्य-रहस बरसाती हो।

जगता छाया-वन में मर्मर, कंप उठती रुध्द स्पृहा थर-थर, तुम आती हो, उर तंत्री में स्वर मधुर व्यथा भर जाती हो।

इति

Sumitranandan Pant

The Poet

सुमित्रानंदन पंत

Sumitranandan Pant

The Meeting of Bhima and Hidimbi

Paired Painting

The Meeting of Bhima and Hidimbi

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Anubhuti carries.