
वसंत
Vasant
Sumitranandan Pant
2 verses · ~18 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

6 verses · ~1 min
तुम आती हो, नव अंगों का शाश्वत मधु-विभव लुटाती हो।
बजते नि:स्वर नूपुर छम-छम, सांसों में थमता स्पंदन-क्रम, तुम आती हो, अंतस्थल में शोभा ज्वाला लिपटाती हो।
अपलक रह जाते मनोनयन कह पाते मर्म-कथा न वचन, तुम आती हो, तंद्रिल मन में स्वप्नों के मुकुल खिलाती हो।
अभिमान अश्रु बनता झर-झर, अवसाद मुखर रस का निर्झर, तुम आती हो, आनंद-शिखर प्राणों में ज्वार उठाती हो।
स्वर्णिम प्रकाश में गलता तम, स्वर्गिक प्रतीति में ढलता श्रम तुम आती हो, जीवन-पथ पर सौंदर्य-रहस बरसाती हो।
जगता छाया-वन में मर्मर, कंप उठती रुध्द स्पृहा थर-थर, तुम आती हो, उर तंत्री में स्वर मधुर व्यथा भर जाती हो।
इति

Paired Painting
The Meeting of Bhima and Hidimbi
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Anubhuti carries.