
कहो कैसे हो
Kaho Kaise Ho
Chandrasen Virat
6 verses · ~23 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
संभव विडंबना भी है साथ नव-सृजन के उल्लास तो बढ़ेंगे, परिहास कम न होंगे
अलगाव की विवशता हरदम निकट रही है इतना प्रयत्न फिर भी दूरी न घट रही है होगा विकास फिर भी संभाव्य है विपर्यय आवास तो बढ़ेंगे, वनवास कम न होंगे।
परिणाम पक्ष में हो परितोष पर न होगा हो प्राप्त सफलताएं संतोष पर न होगा हर प्राप्ति में विफलता का बोध शेष होगा हों भोज अधिक फिर भी उपवास कम न होंगे
भौतिक पदार्थवादी उपलब्धियां बढ़ेंगी रक्तों रंगी वसीयत क्या पीढ़ियां पढ़ेंगी? उपभोग्य वस्तुओं में है वस्तु आदमी भी सपन्नता बढ़ेगी, संत्रास कम न होंगे।
इति

Paired Painting
Bheeshma's Oath
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sambhav Vidambana Bhi carries.