№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Women Bathing by the River

Shanta

रेत में दोपहर

Ret Mein Dopahar

Shriprakash Shukla
2 min read 10 versesदोपहरafternoonरेत

10 verses · ~2 min

रेत धीरे-धीरे गरम हो रही है कूचियाँ धीरे-धीरे नरम हो रही है

तन चारों ओर से तप रहा है मन है कि बार बार तपती रेत में भुंज रहा है

रेत व मन के बीच उम्मीद का तनाव है बार-बार भूजे जाने के बावजूद मन भीतर रहने को बेताब है

मन के भीतर आकृतियाँ उभर रही हैं सतह धीरे-धीरे हल्की हो रही है और अनंत प्रकार की आकृतियाँ उठती चली आ रही हैं

यह रेत का रेत में विस्तार है नदी भाप बनकर उठ रही है औेर रेत को अनंत आकृतियों में छोप लेती हे

यह दोपहर की रेत है जहां रेत अपनी पूरी मादकता के साथ शिशिर से खेल रही है और जो पसीने की बंदें गिरती हैं रेत में ख़ुद ब ख़ुद एक आकृति उभर आती हैं

यह कलाकार के पसीने की आकृतियाँ हैं जिसमें रेत ने अपने को खुला छोड़ रखा है लगभग निर्वस्त्र होने की हद तक

यह रेत का आमंत्रण नहीं है यह कूचियों का खेलना है और रेत है कि अपनी असीम आनंद के साथ लेटी है उत्साही कलाकारों की थाप तले!

दोपहर की चढ़ती धूप तले जहाँ देह थोड़ी हाँफने लगी है और नेह के नाते डगमगाने लगे हैं ये कलाकार हैं जो पिता की भूमिका में नन्हें-नन्हें हाथों को थोड़ी-थेाड़ी काया दे रहे हैं और थेाड़ी-थोड़ी छाया भी!

रचनाकाल: 19.01.2008

इति

Shriprakash Shukla

The Poet

श्रीप्रकाश शुक्ल

Shriprakash Shukla

Women Bathing by the River

Paired Painting

Women Bathing by the River

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ret Mein Dopahar carries.