
रामफेर
Rampher
Shriprakash Shukla
9 verses · ~26 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

12 verses · ~3 min
गंगापार छाटपार आकाश में सरकता सूरज जिस समय गंगा के ठीक वक्ष पर चमक रहा था बालू को बांधने की हरकत में कलाकारों का अनंत आकाश धरती पर उतरने की कोशिश कर रहा था
धरती जिस पर आकाश से गिराये गये बमेां की गंूज थी जहां अभी अभी सद्दाम को फांसी दी गयी थी जहां निठारी कांड से निकलने वाले मासूम खून के धब्बे अभी सूखे भी नहीं थे
काशी के कलाकारों ने अपनी आकृतियों में एक रंग भरने की कोशिश की थी लगभग नीला रंग
इस रंग में छाहीं से लेकर निठारी तक का ढंग था अस्सी से लेकर मणिकर्णिका तक की चाल थी सीवर से लेकर सीवन तक का प्रवाह था मेढक से लेकर मगरमच्छ तक की आवाजाही थी
यहां रेत में उभरी आकृतियों के बीच हर कोई ढूंढ रहा था अपनी आकृति और हर कोई भागता था अपनी ही आकृति से
यहां सब था और सबके वावजूद बहुत कुछ ऐसा था जो वहां नहीं था जिसे कलाकारों की आंखों में देखा जा सकता था
आंखें जो नदी के तल जैसी गहरी और उदास थी जिसमें गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक का विस्तार था जहां स्वर्ग की इच्छा से अधिक नरक की मर्यादा थी
यह मकर संक्राति के विल्कुल पास का समय था जहां यह पार उदास था तो वह पार गुलजार
इस पार सन्नाटा था उस पार शोर
आज इस सन्नाटे में एक संवाद था लगभग मद्धिम कूचियों में सरकता हुआ संवाद जिसमें बार बार विश्वास हो रहा था कि जब कभी उदासी के गहन अंधकार के बाहर निकलने की बात उठेगी जो कि उठेगी ही बहुत याद आयेंगे ये कलाकार काशी कैनवस के ये कलाकार गंगापार छाटपार ।
बनारस में प्रत्येक वर्ष 19 जनवरी को गंगापार के इलाके में मूर्तिकार मदनलाल के संयोजन में अपने गुरू मूर्तिकार राम छाटपार की स्मृति में युवा कलाकारों द्वारा रेत में आकृतियों का निर्माण किया जाता है ।
रचनाकार: अक्टूबर 2007
इति

Paired Painting
Rajrajeswuree Ghat, Benares
James Prinsep, a polymath and scholar stationed in Benares, captured this scene with a profound sense of devotion to the city: he documented it with scientific precision and artistic grace. The Rajrajeswuree Ghat stands here as a living testament to the spiritual heartbeat of Varanasi, where the sacred waters of the Ganges meet the enduring stone architecture. Through this lithograph, we are invited to witness a moment of daily life, where the mundane activities of laborers and travelers harmonize with the monumental presence of the temples. Prinsep saw Benares not merely as a colonial assignment, but as a site of immense human complexity, and his hand reflects a deep reverence for the people and structures that define this holy city.
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ret Mein Aakritiyan carries.