थके हुए कलाकार से
Thake Hue Kalakar Se
Dharamvir Bharati
9 verses · ~19 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

7 verses · ~1 min
बालू के कण कण साथ ले चलो उड़ जा हारिल की नाईं सुबह हुई अब सपने छूटे उठ जा हरकारे की ठाईं।
ठोक पीटकर आकृति दे दो बांधो नदी नाव की खाईं जग जीतो सब लहरें गिन लो कर लो तट को वश में साईं ।
तेरे हाथों में है ताकत बढ़ो सृजन पथ माथ न दो तेरी मुटठी में दुनिया है बाधो हाथ विराम न दो ।
बालू गंगा का स्वरुप है गंगा क्या इतनी-सी, पर है बालू बालू में प्रवाह को किसने धारा दी, जी भर है ।
लेाग रहेंगे आते-जाते तन भर तुझको देखेंगे उठते-गिरते जो संभलेंगे मन भर तुमको भेटेंगें ।
इस या उस की बात नहीं है हर आकृति में तेरा बल है जो दुनिया से चलकर जाता तेरी नज़रों की हलचल है ।
रचनाकाल: 12.03.2008
इति

Paired Painting
Gangavatarana
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ret Mein Kalakar carries.