
माँ...क्या एक बार फिर मिलोगी?
Maa... Kya Ek Baar Phir Milogi?
Anjana Bhatt
13 verses · ~53 lines · 3 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

7 verses · ~1 min
मरे हए लोगों के इस शहर में हर आदमी अपने पुर्नजन्म को लेकर परेशान है
मरे हुए लोग मरे हुए लोगों में शामिल नहीं हैं उन्हें अपने मरने से परहेज है जबकि न जाने कितने पहले वे मर चुके हैं
मरे हुए लोगों के अपने झोले हैं अपनी टंगारी और अपनी तगाड़ी
सिर से पाँव तक उनके पास सूचनायें हैं और वे खुद एक सूचना हैं हमारे समय में डाकिये की तरह
कील जब कभी चुभती है उनके चेहरों पर खिंचता है एक तनाव उसे ढीला करने की वे करते हैं कोशिश और थोड़ी देर बाद खचिया भर मड़िया में उतराने लगते हैं
मरे हुए लोग जीने की आशा लिए लगातार मरते जा रहे हैं अपनी सारी बरक्कत के बावजूद इस पवित्र शहर में!
रचनाकाल: 12.01.2008
इति

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Dark and difficult was the Road
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Mare Hue Log carries.