
सोये हुए लोगों के बीच जागना पड़ रहा है मुझे
Soye Hue Logon Ke Beech Jagna Padh Raha Hai Mujhe
Shalabh Shriram Singh
5 verses · ~23 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Ye Sadaon Ki Baat Chalne Do
Shalabh Shriram Singh12 verses · ~2 min
ये सदाओं की बात चलने दो अब असाओं की बात चलने दो
बावफ़ाई है सर निगूँ जिन से बेवफ़ाओं की बात चलने दो
अब दुआओं से घुट रहा है दम बददुआओं की बात चलने दो
अब्रे-जुल्मत निगल गया जिनको उन शुआओं की बात चलने दो
जिनकी तामीर है जहाने-अमल उन ख़ुदाओं की बात चलने दो
जिनकी अजमत रही शोला नशीं उन अनाओं की बात चलने दो
ज़िक्रे-आतिश बहुत हुआ यारो अब हवाओं की बात चलने दो
रोशनी को जहाँ पनाह मिले उन फजाओं की बात चलने दो
मंज़िले जिनका इंतेख़ाब करें ऐसे पाँवों की बात चलने दो
जिनके होने से हो गया हूँ ’शलभ’ उन खताओं की बात चलने दो
रचनाकाल: 03 फ़रवरी 1982,
शलभ श्रीराम सिंह की यह रचना उनकी निजी डायरी से कविता कोश को चित्रकार और हिन्दी के कवि कुँअर रवीन्द्र के सहयोग से प्राप्त हुई। शलभ जी मृत्यु से पहले अपनी डायरियाँ और रचनाएँ उन्हें सौंप गए थे।
इति

Paired Painting
Rama Breaks the Bow
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ye Sadaon Ki Baat Chalne Do carries.