№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Rama Breaks the Bow

Shanta

ये सदाओं की बात चलने दो

Ye Sadaon Ki Baat Chalne Do

Shalabh Shriram Singh
2 min read 12 versesसदाओंदुआओंबददुआओं

12 verses · ~2 min

ये सदाओं की बात चलने दो अब असाओं की बात चलने दो

बावफ़ाई है सर निगूँ जिन से बेवफ़ाओं की बात चलने दो

अब दुआओं से घुट रहा है दम बददुआओं की बात चलने दो

अब्रे-जुल्मत निगल गया जिनको उन शुआओं की बात चलने दो

जिनकी तामीर है जहाने-अमल उन ख़ुदाओं की बात चलने दो

जिनकी अजमत रही शोला नशीं उन अनाओं की बात चलने दो

ज़िक्रे-आतिश बहुत हुआ यारो अब हवाओं की बात चलने दो

रोशनी को जहाँ पनाह मिले उन फजाओं की बात चलने दो

मंज़िले जिनका इंतेख़ाब करें ऐसे पाँवों की बात चलने दो

जिनके होने से हो गया हूँ ’शलभ’ उन खताओं की बात चलने दो

रचनाकाल: 03 फ़रवरी 1982,

शलभ श्रीराम सिंह की यह रचना उनकी निजी डायरी से कविता कोश को चित्रकार और हिन्दी के कवि कुँअर रवीन्द्र के सहयोग से प्राप्त हुई। शलभ जी मृत्यु से पहले अपनी डायरियाँ और रचनाएँ उन्हें सौंप गए थे।

इति

Shalabh Shriram Singh

The Poet

शलभ श्रीराम सिंह

Shalabh Shriram Singh

Rama Breaks the Bow

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Rama Breaks the Bow

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ye Sadaon Ki Baat Chalne Do carries.