
ये सदाओं की बात चलने दो
Ye Sadaon Ki Baat Chalne Do
Shalabh Shriram Singh
12 verses · ~18 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Soye Hue Logon Ke Beech Jagna Padh Raha Hai Mujhe
Shalabh Shriram Singh5 verses · ~2 min
सोये हुए लोगों के बीच जागना पड़ रहा है मुझे परछाइयों से नीद में लड़ते हुए लोग जीवन से अपरिचित अपने से भागे अपने जूतों की कीलें चमका कर संतुष्ट संतुष्ट अपने झूठ की मार से अपने सच से मुँह फेर कर पड़े रोशनी को देखकर मूँद लेते हैं आँखें
सोते हुए लोगों के बीच जागना पड़ रहा है मुझे ऋतुओं से डरते हैं, ये डरते हैं ताज़ा हवा के झोंकों से बारिश का संगीत इन पर कोई असर नहीं डालता पहाड़ों की ऊँचाई से बेख़बर समन्दरों की गहराई से नावाकिफ़ रोटियों पर लिखे अपने नाम की इबारत नहीं पढ़ सकते तलाश नहीं सकते ज़मीन का वह टुकड़ा जो इनका अपना है
सोये हुए लोगों के बीच जागना पड़ रहा है मुझे इनकी भावना न चुरा ले जाए कोई चुरा न ले जाए इनका चित्र इनके विचारों की रखवाली करनी पड रही है मुझे रखवाली करनी पड रही है इनके मान की सोये हुए लोगों के बीच जागना पड़ रहा है मुझे
रचनाकाल: 1991
शलभ श्रीराम सिंह की यह रचना उनकी निजी डायरी से कविता कोश को चित्रकार और हिन्दी के कवि कुँअर रवीन्द्र के सहयोग से प्राप्त हुई। शलभ जी मृत्यु से पहले अपनी डायरियाँ और रचनाएँ उन्हें सौंप गए थे।
इति

Paired Painting
Nala and Damayanti in the Forest
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Soye Hue Logon Ke Beech Jagna Padh Raha Hai Mujhe carries.