№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Gypsies

Karuna

कहाँ हूँ मैं

Kahan Hoon Main

Pratibha Saxena
4 min read 8 versesअस्तित्वidentityloneliness

8 verses · ~4 min

कहाँ हूँ मैं! ढूँढ रही अपने को दुनिया की भीड़ में उत्सव -हुलास इधर , मस्त-मगन लोग संभव है यहीं- कहीं सामना हो जाय लोगों में घूम फिरी कहाँ -कहाँ ढूँढ फिरी! नहीं ,यहाँ कहीं नहीं! नहीं मिली! पता नहीं कहाँ हूँ ! खोजूँ कहाँ अपने को? हूं भी , कि हूँ ही नहीं ?

यहीं दूर खड़ा कौन? होकर असिक्त , निर्लिप्त सभी रंगों से! चुप्प ,एक दर्शक -सा! चेहरा बहुत जाना-पहचाना , ओह ,मैं ही तो! यहाँ हूँ , लेकिन उपस्थित नहीं! रुका जाता नहीं यहाँ, और कहीं निकल चलो!

उधऱ एक बालक अकेला असहाय, रोचा सिसकता लगातार , कंठ घरघराता ,बीमार , रोते-रोते थक गया सा! माँ उधर उत्सव के आंगन के नलके पर खुशियों के भाँडों में जमी -जली खुरचन को , जूठन की पर्तों में जकड़े हुये बर्तन को, रगड़-रगड़ धोयेगी , नहीं उठ पायेगी! कुछ न कर पायेगी!

बालक? अकेला पड़ा रुक-रुक रोयेगा! भूखा, अकेला ,बीमार , कैसे सोयेगा? कोई नहीं जो नेह दृष्टि डाल सहला दे! बहला दे, लगा ले आँचल से थपक कर सुला दे! आते-जाते अपने में मगन लोग, कोई देखता ही नहीं!

कोई है , , ख़ड़ा यहीं ,सिक्त दृष्टि ले दुलारता , नयनों में झाँकता निहारता! अपने ही आँसुओं को पल्ले से पोंछता खड़ा यहीं के यहीं! नैन अभी गीले हैं , आँसू बहे आये गाल मेरे हैं! फिर -फिर पोंछ रहे हाथ यही मेरे हैं! दृष्टि ने कहा था यही - ' कोख-जाया माँ ,उस जनम का मैं तुम्हारा हूँ! भूल गईं?' फेर नहीं पा रही निगाह कैसे छोड़ दूँ अकेला असहाय! लौट जाओ मेरे प्रतिरूप मेरे बिना कौन उसे देखेगा ? हीं ठीक हूँ मैं !

राग-रंग मुझसे दूर-दूर रह जायेंगे , परस नहीं पायेंगे, कोशिशे बेकार हर बार! पडे हुये कुण्ठित सुख -बोध सभी, मेरी गुज़र नहीं कहीं! डुबा सकी होती मन क्षण भर ही, काश ,कहीं!

मत कहो आने को! रोने की क्षीण ध्वनि , सुख की उल्लास भरी तानो को चीरती , वहाँ तक चली आयेगी! कानो से रह-रह टकरायेगी! मुझे यहीं रहना है! रोता अकेला उसे छोड़ कहाँ जाऊँगी! लौट यहीं आऊँगी!!

दूर , रंग- मंडप की हलचल से अलग-थलग , रहने दो कोशिशे, बेकार! यहीं ठीक हूँ मैं - निष्कासित हुई-सी, निस्संग!

इति

Pratibha Saxena

The Poet

प्रतिभा सक्सेना

Pratibha Saxena

Gypsies

Paired Painting

Gypsies

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kahan Hoon Main carries.