
छिनाय गयो हमरो ही नाम
Chinay Gayo Hamro Hi Name
Pratibha Saxena
6 verses · ~21 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~2 min
कहाँ है मेरा घर? जाना चाहती हूँ , रहना चाहती हूँ अब वहीं! छोटी थी तो समझ में नहीं आता था , सुनती थी पराई अमानत हूँ, अपने घर जाकर जो मन आये करना! धीरे-धीरे समझ में आता गया कि यह घर मेरा नहीं । पर फिर यहाँ जन्म क्यों लिया?
बड़ी हुई - घर ढूँढा जाने लगा जहाँ भेज दी जाऊं , उऋण हो जायें ये लोग ,भार मुक्त! चुपचाप चली आई नये लोगों में! पर ये घर तो उनका था जो लोग यहीं रहते आये थे!
मैं नवागता , ढालती रही अपने को उनके हिसाब से! नाम उनका ,धाम उनका , सारी पहचान उनकी! बनाये रखने की जिम्मेदारी मेरी थी , निभाती रही! निबटाते -निबटाते चुक गई , अब भी रह रही हूँ पराये घरों में , सबके अपने ढंग!
ढाल रही हूँ फिर अपने को कितनी बार ,कितनी तरह! अंतर्मन बार-बार पुकारता है - 'चलो अपने घर चलो!' जनम-जनम से गुमनाम भटक रही हूं! कहाँ है मेरा घर!
इति

Paired Painting
Woman with Fruit Plate
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Apana Ghar carries.