
संस्कृति का प्रश्न
Sanskriti Ka Prashna
Sumitranandan Pant
5 verses · ~18 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

3 verses · ~1 min
यह संस्कृति का वट-वृक्ष, पुरातन-चिरनूतन, कह 'चरैवेति' जो सतत खोजता नए सत्य, जड़ का विस्तार सुदूर माटियों को जोड़े निर्मल, एकात्म चेतना का जीवन्त उत्स.
आधार बहुत दृढ़ है कि इसी की शाखाएँ मिट्टी में रुप कर स्वयं मूल बनती जातीं, जिसकी छाया में आर्त मनुजता शीतल हो चिन्ताधारा में नूतन स्वस्ति जगी पाती.
इस ग्रहणशीलता पर संशय न उठे कोई, हर फल में रूप धरे संभावित वृक्ष बीज. वन-सागर पर्वत सहित कुटुंब धरा का हो, मानवता का आवास द्वीप औ' महाद्वीप!
इति

Paired Painting
A Preacher Expounding the Poorans, In the Temple of Unn Poorna, Benares
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Charaiveti carries.