
संस्कृति का प्रश्न
Sanskriti Ka Prashna
Sumitranandan Pant
5 verses · ~18 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

3 verses · ~1 min
कृषि युग से वाहित मानव का सांस्कृतिक हृदय जो गत समाज की रीति नीतियों का समुदय, आचार विचारों में जो बहु देता परिचय, उपजाता मन में सुख दुख, आशा, भय, संशय, जो भले बुरे का ज्ञान हमें देता निश्चित सामंत जगत में हुआ मनुज के वह निर्मित।
उन युग स्थितियों का आज दृश्य पट परिवर्तित, प्रस्तर युग की सभ्यता हो रही अब अवसित। जो अंतर जग था वाह्य जगत पर अवलंबित वह बदल रहा युगपत युग स्थितियों से प्रेरित। बहु जाति धर्म औ’ नीति कर्म में पा विकास गत सगुण आज लय होने को: औ’ नव प्रकाश नव स्थितियों के सर्जन से हो अब शनैः उदय बन रहा मनुज की नव आत्मा, सांस्कृतिक हृदय।
रचनाकाल: फ़रवरी’ ४०
इति

Paired Painting
Pandavas and Krishna on a Palace Balcony
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sanskritik Hriday carries.