№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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The Birth of Shakuntala

Karuna

किस बाग़ में मैं जन्मा खेला

Kis Baagh Mein Main Janma Khela

Kavi Pradeep
2 min read 4 versesबचपनchildhoodयादें

4 verses · ~2 min

किस बाग़ में मैं जन्मा खेला मेरा रोम रोम ये जानता है तुम भूल गए शायद माली पर फूल तुम्हे पहचानता है जो दिया था तुमने एक दिन मुझे फिर वो प्यार दे दो एक क़र्ज़ मांगता हूँ बचपन उधार दे दो

तुम छोड़ गए थे जिसको एक धूल भरे रस्ते में वो फूल आज रोता है एक अमीर के गुलदस्ते में मेरा दिल तड़प रहा है मुझे फिर दुलार दे दो एक क़र्ज़ मांगता हूँ बचपन उधार दे दो...

मेरी उदास आँखों को है याद वो वक़्त सलोना जब झूला था बांहों में मैं बन के तुम्हारा खिलौना मेरी वो ख़ुशी की दुनिया फिर एक बार दे दो एक क़र्ज़ मांगता हूँ बचपन उधार दे दो...

तुम्हे देख उठते है मेरे पिछले दिन वो सुन्हेरे और दूर कहीं दिखते हैं मुझसे बिछड़े दो चेहरे जिसे सुनके घर वो लौटे मुझे वो पुकार दे दो एक क़र्ज़ मांगता हूँ बचपन उधार दे दो...

इति

Kavi Pradeep

The Poet

प्रदीप

Kavi Pradeep

The Birth of Shakuntala

Paired Painting

The Birth of Shakuntala

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kis Baagh Mein Main Janma Khela carries.