№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Radha Krishna

Shringara

मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी

Machal Mat, Door-Door, O Maani

Makhanlal Chaturvedi
2 min read 9 versesमानीproudकुटिया

9 verses · ~2 min

मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी! उस सीमा-रेखा पर जिसके ओर न छोर निशानी; मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!

घास-पात से बनी वहीं मेरी कुटिया मस्तानी, कुटिया का राजा ही बन रहता कुटिया की रानी! मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!

राज-मार्ग से परे, दूर, पर पगडंडी को छू कर अश्रु-देश के भूपति की है बनी जहाँ रजधानी । मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!

आँखों में दिलवर आता है, सैन-नसैनी चढ़कर, पलक बाँध पुतली में झूले देती कस्र्ण कहानी। मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!

प्रीति-पिछौरी भीगा करती पथ जोहा करती हूँ, जहाँ गवन की सजनि रमन के हाथों खड़ी बिकानी। मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!

दो प्राणों में मचे न माधव बलि की आँख मिचौनी, जहाँ काल से कभी चुराई जाती नहीं जवानी। मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!

भोजन है उल्लास, जहाँ आँखों का पानी, पानी! पुतली परम बिछौना है ओढ़नी पिया की बानी। मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!

प्रान-दाँव की कुंज-गली है, गो-गन बीचों बैठी, एक अभागिन बनी श्याम धन बनकर राधारानी। मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!

सोते हैं सपने, ओ पंथी! मत चल, मत चल, मत चल, नजर लगे मत, मिट मत जाये साँसों की नादानी। मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!

इति

Makhanlal Chaturvedi

The Poet

माखनलाल चतुर्वेदी

Makhanlal Chaturvedi

Radha Krishna

Paired Painting

Radha Krishna

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Machal Mat, Door-Door, O Maani carries.