
ऊषा के सँग, पहिन अरुणिमा
Usha Ke Sang Pahin Arunima
Makhanlal Chaturvedi
9 verses · ~28 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Machal Mat, Door-Door, O Maani
Makhanlal Chaturvedi9 verses · ~2 min
मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी! उस सीमा-रेखा पर जिसके ओर न छोर निशानी; मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!
घास-पात से बनी वहीं मेरी कुटिया मस्तानी, कुटिया का राजा ही बन रहता कुटिया की रानी! मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!
राज-मार्ग से परे, दूर, पर पगडंडी को छू कर अश्रु-देश के भूपति की है बनी जहाँ रजधानी । मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!
आँखों में दिलवर आता है, सैन-नसैनी चढ़कर, पलक बाँध पुतली में झूले देती कस्र्ण कहानी। मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!
प्रीति-पिछौरी भीगा करती पथ जोहा करती हूँ, जहाँ गवन की सजनि रमन के हाथों खड़ी बिकानी। मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!
दो प्राणों में मचे न माधव बलि की आँख मिचौनी, जहाँ काल से कभी चुराई जाती नहीं जवानी। मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!
भोजन है उल्लास, जहाँ आँखों का पानी, पानी! पुतली परम बिछौना है ओढ़नी पिया की बानी। मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!
प्रान-दाँव की कुंज-गली है, गो-गन बीचों बैठी, एक अभागिन बनी श्याम धन बनकर राधारानी। मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!
सोते हैं सपने, ओ पंथी! मत चल, मत चल, मत चल, नजर लगे मत, मिट मत जाये साँसों की नादानी। मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी!
इति

Paired Painting
Radha Krishna
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Machal Mat, Door-Door, O Maani carries.