№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Portrait of Maharana Pratap

Veera

एक तुम हो

Ek Tum Ho

Makhanlal Chaturvedi
2 min read 4 versesभारतहिमालयतिरंगा

4 verses · ~2 min

गगन पर दो सितारे: एक तुम हो, धरा पर दो चरण हैं: एक तुम हो, ‘त्रिवेणी’ दो नदी हैं! एक तुम हो, हिमालय दो शिखर है: एक तुम हो, रहे साक्षी लहरता सिंधु मेरा, कि भारत हो धरा का बिंदु मेरा ।

कला के जोड़-सी जग-गुत्थियाँ ये, हृदय के होड़-सी दृढ वृत्तियाँ ये, तिरंगे की तरंगों पर चढ़ाते, कि शत-शत ज्वार तेरे पास आते ।

तुझे सौगंध है घनश्याम की आ, तुझे सौगंध भारत-धाम की आ, तुझे सौगंध सेवा-ग्राम की आ, कि आ, आकर उजड़तों को बचा, आ । तुम्हारी यातनाएँ और अणिमा, तुम्हारी कल्पनाएँ और लघिमा, तुम्हारी गगन-भेदी गूँज, गरिमा, तुम्हारे बोल! भू की दिव्य महिमा तुम्हारी जीभ के पैंरो महावर, तुम्हारी अस्ति पर दो युग निछावर । रहे मन-भेद तेरा और मेरा, अमर हो देश का कल का सबेरा, कि वह कश्मीर, वह नेपाल; गोवा; कि साक्षी वह जवाहर, यह विनोबा, प्रलय की आह युग है, वाह तुम हो, जरा-से किंतु लापरवाह तुम हो।

रचनाकाल: खण्डवा-१९४०

इति

Makhanlal Chaturvedi

The Poet

माखनलाल चतुर्वेदी

Makhanlal Chaturvedi

Portrait of Maharana Pratap

Paired Painting

Portrait of Maharana Pratap

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ek Tum Ho carries.