№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Woman Lighting a Lamp

Shanta

दीपक अब रजनी जाती रे

Deepak Ab Rajni Jaati Re

Mahadevi Varma
1 min read 4 versesदीपकरजनीअमरता

4 verses · ~1 min

दीपक अब रजनी जाती रे

जिनके पाषाणी शापों के तूने जल जल बंध गलाए रंगों की मूठें तारों के खील वारती आज दिशाएँ तेरी खोई साँस विभा बन भू से नभ तक लहराती रे दीपक अब रजनी जाती रे

लौ की कोमल दीप्त अनी से तम की एक अरूप शिला पर तू ने दिन के रूप गढ़े शत ज्वाला की रेखा अंकित कर अपनी कृति में आज अमरता पाने की बेला आती रे दीपक अब रजनी जाती रे

धरती ने हर कण सौंपा उच्छवास शून्य विस्तार गगन में न्यास रहे आकार धरोहर स्पंदन की सौंपी जीवन रे अंगारों के तीर्थ स्वर्ण कर लौटा दे सबकी थाती रे दीपक अब रजनी जाती रे

इति

Mahadevi Varma

The Poet

महादेवी वर्मा

Mahadevi Varma

Woman Lighting a Lamp

Paired Painting

Woman Lighting a Lamp

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Deepak Ab Rajni Jaati Re carries.