
जीवन दीप
Jeevan Deep
Mahadevi Varma
5 verses · ~11 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
दीपक अब रजनी जाती रे
जिनके पाषाणी शापों के तूने जल जल बंध गलाए रंगों की मूठें तारों के खील वारती आज दिशाएँ तेरी खोई साँस विभा बन भू से नभ तक लहराती रे दीपक अब रजनी जाती रे
लौ की कोमल दीप्त अनी से तम की एक अरूप शिला पर तू ने दिन के रूप गढ़े शत ज्वाला की रेखा अंकित कर अपनी कृति में आज अमरता पाने की बेला आती रे दीपक अब रजनी जाती रे
धरती ने हर कण सौंपा उच्छवास शून्य विस्तार गगन में न्यास रहे आकार धरोहर स्पंदन की सौंपी जीवन रे अंगारों के तीर्थ स्वर्ण कर लौटा दे सबकी थाती रे दीपक अब रजनी जाती रे
इति

Paired Painting
Woman Lighting a Lamp
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Deepak Ab Rajni Jaati Re carries.