№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Kadambari

Shringara

अजब जोबन है गुल पर आमदे फ़स्ले बहारी है

Ajab Joban Hai Gul Par Aamde Fasle Bahari Hai

Bharatendu Harishchandra
2 min read 8 versesग़ज़लghazalउर्दू

8 verses · ~2 min

अजब जोबन है गुल पर आमदे फ़स्ले बहारी है । शिताब आ साकिया गुलरू[1] कि तेरी यादगारी है ।

रिहा करता है सैयादे सितमगर मौसिमे गुल में । असीराने[2] कफ़स[3] लो तुमसे अब रुख़सत हमारी है ।

किसी पहलू नहीं आराम आता तेरे आशिक को । दिले मुज़तर[4] तड़पता है निहायत बेक़रारी है ।

सफ़ाई देखते ही दिल फड़क जाता है बिस्मिल[5] का । अरे जल्लाद तेरे तेग़[6] की क्या आबदारी[7] है ।

दिला[8] अब तो फ़िराक़े[9] यार में यह हाल है अपना कि सर जानू पर है और ख़ून दह आँखों से जारी है ।

इलाही ख़ैर कीजो कुछ अभी से दिल धड़कता है । सुना है मंज़िले औवल[10] की पहली रात भारी है ।

'रसा' महवे[11] फ़साहत[12] दोस्त क्या दुश्मन भी हैं सारे । ज़माने में तेरे तर्ज़े सख़ुन की यादगारी है ।

शब्दार्थ:

इति

Bharatendu Harishchandra

The Poet

भारतेंदु हरिश्चंद्र

Bharatendu Harishchandra

Kadambari

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Kadambari

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