№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Reclining Woman

Shanta

पुस्तक

Pustak

Divik Ramesh
1 min read 6 versesपुस्तकbookज्ञान

6 verses · ~1 min

मुझको तो पुस्तक तुम सच्ची अपनी नानी / दादी लगती ये दोनों तो अलग शहर में पर तुम तो घर में ही रहती

जैसे नानी दुम दुम वाली लम्बी एक कहानी कहती जैसे चलती अगले भी दिन दादी एक कहानी कहती मेरी पुस्तक भी तो वैसी ढेरों रोज कहानी कहती

पर मेरी पुस्तक तो भैया पढ़ी-लिखी भी सबसे ज़्यादा जो भी चाहूँ झट बतलाती नया पुराना ज़्यादा-ज़्यादा

एक पते की बात बताऊँ पुस्तक पूरा साथ निभाती छूटें अगर अकेले तो यह झटपट उसको मार भगाती

मैं तो कहता हर मौक़े पर ढेर पुस्तकें हमको मिलती सच कहता हूँ मेरी ही क्या हर बच्चे की बाँछे खिलती

नदिया के जल सी ये कोमल पर्वत के पत्थर सी कड़यल चिकने फर्श से ज्यादा चिकनी खूब खुरदरी जैसे दाढ़ी

इति

Divik Ramesh

The Poet

दिविक रमेश

Divik Ramesh

Reclining Woman

Paired Painting

Reclining Woman

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Pustak carries.