
मैं बहुत खुश हूँ अगर
Main Bahut Khush Hun Agar
Amarnath Srivastava
2 verses · ~27 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

14 verses · ~2 min
सुनाई पड़ते हैं सुनाई पड़ते हैं कभी कभी उनके स्वर जो नहीं रहे
दादाजी और बाई और गिरिजा और सरस और नीता और प्रायः सुनता हूँ जो स्वर वे शिकायात के होते हैं
की बेटा या भैया या मन्ना
ऐसी-कुछ उम्मीद की थी तुमसे चुपचाप सुनता हूँ और ग़लतियाँ याद आती हैं दादाजी को
अपने पास नहीं रख पाया उनके बुढ़ापे में
निश्चय ही कर लेता तो ऐसा असंभव था क्या रखना उन्हें दिल्ली में
पास नहीं था बाई के उनके अंतिम घड़ी में हो नहीं सकता था क्या
जेल भी चला गया था उनसे पूछे बिना गिरिजा!
और सरस और नीता तो बहुत कुछ कहते हैं
जब कभी सुनाई पड़ जाती है इनमें से किसी की आवाज़ बहुत दिनों के लिए बेकाम हो जाता हूँ एक और आवाज़
सुनाई पड़ती है जीजाजी की वे शिकायत नहीं करते
हंसी सुनता हूँ उनकी मगर हंसी में शिकायत का स्वर नहीं होता ऐसा नहीं है मैं विरोध करता हूँ इस रुख़ का प्यार क्यों नहीं देते
चले जाकर अब दादाजी या बाई गिरिजा या सरस नीता और जीजाजी
जैसा दिया करते थे तब जब मुझे उसकी उतनी ज़रुरत नहीं थी.
इति

Paired Painting
King Dashratha Recounting the Curse of Shravan Kumar
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sunai Padte Hain carries.