№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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King Dashratha Recounting the Curse of Shravan Kumar

Karuna

सुनाई पड़ते हैं

Sunai Padte Hain

Bhawani Prasad Mishra
2 min read 14 versesपूर्वजancestorsयादें

14 verses · ~2 min

सुनाई पड़ते हैं सुनाई पड़ते हैं कभी कभी उनके स्वर जो नहीं रहे

दादाजी और बाई और गिरिजा और सरस और नीता और प्रायः सुनता हूँ जो स्वर वे शिकायात के होते हैं

की बेटा या भैया या मन्ना

ऐसी-कुछ उम्मीद की थी तुमसे चुपचाप सुनता हूँ और ग़लतियाँ याद आती हैं दादाजी को

अपने पास नहीं रख पाया उनके बुढ़ापे में

निश्चय ही कर लेता तो ऐसा असंभव था क्या रखना उन्हें दिल्ली में

पास नहीं था बाई के उनके अंतिम घड़ी में हो नहीं सकता था क्या

जेल भी चला गया था उनसे पूछे बिना गिरिजा!

और सरस और नीता तो बहुत कुछ कहते हैं

जब कभी सुनाई पड़ जाती है इनमें से किसी की आवाज़ बहुत दिनों के लिए बेकाम हो जाता हूँ एक और आवाज़

सुनाई पड़ती है जीजाजी की वे शिकायत नहीं करते

हंसी सुनता हूँ उनकी मगर हंसी में शिकायत का स्वर नहीं होता ऐसा नहीं है मैं विरोध करता हूँ इस रुख़ का प्यार क्यों नहीं देते

चले जाकर अब दादाजी या बाई गिरिजा या सरस नीता और जीजाजी

जैसा दिया करते थे तब जब मुझे उसकी उतनी ज़रुरत नहीं थी.

इति

Bhawani Prasad Mishra

The Poet

भवानीप्रसाद मिश्र

Bhawani Prasad Mishra

King Dashratha Recounting the Curse of Shravan Kumar

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King Dashratha Recounting the Curse of Shravan Kumar

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sunai Padte Hain carries.