№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Goddess Kali

Raudra

प्रलय

Pralaya

Bhawani Prasad Mishra
4 min read 7 versesप्रलयapocalypseमृत्यु

7 verses · ~4 min

एक दिन होगी प्रलय भी; मिट (मत) रहेगी झोपड़ी, मिट जायेंगे नीलम-निलय भी|

सात है सागर किसी दिन फैल एकाकार होंगे, पंच तत्वों मे गये बीते बिचारे चार होंगें, धार मे बहना कहाँ का अतल तक डुबकी लगेगी; जागना तब व्यर्थ ही होगा, अगर जगती जगेगी! देखने की चीज़ होगी मृत्यु की वैसी विजय भी| एक दिन होगी प्रलय भी|

जब समुन्दर बढ़ रहा होगा, बड़ी भगदड़ मचेगी, और बडवानल निगोड़ी, सामने आ कर नचेगी, क्या बुझाएंगे फायर पम्प मन मारे जलेंगे, मौत रानी के यहाँ उस दिन बड़े दीपक बलेंगे लजा कर रह जायगी उस रोज़ विद्युत् की अन्य भी| एक दिन होगी प्रलय भी|

हर हिमालय श्रृंग पर उठती लहर की ताल होगी, और बर्फीली सतह बडवाग्नि पीकर लाल होगी, कल होंगी तारिणी गंगा, तरनिजा व्याल होंगी; और शिव होंगे न शंकर, कंठगत नर-नाल होगी; कर न पायेगा हमें आश्वस्त जननी का अभय भी| एक दिन होगी प्रलय भी!

हम की मिट्टी के खिलोने, बूंद पड़ते गल मरेंगे! हम की तिनके धार मे बहते, शिखा छू जल मरेंगे; नाश की किरणे कि द्वादश सूर्य से श्रृंगार होगा; कौन सा वह बुलबुला होगा कि मत अंगार होगा— किस तरह वरदा सफल होंगी बहुत होकर सदय भी| एक दिन होगी प्रलय भी!

वह प्रलय का एक दिन, हर दिन सरकता आ रहा है; काल गायक गीत धीमे ही सही, पर गा रहा है; उस महा संगीत का हर प्राण में कम्पन चला है; उस महा संगीत का स्वर, प्राण पर अपने पाला है; आँख मीचे चल रहा है जग कि चलता है समय भी| एक दिन होगी प्रलय भी!

इस दुखी संसार में जितना बने हम सुख लुटा दें; बन सके तो निष्कपट मृदु हास के, दो कन जुटा दें; दर्द कि ज्वाला जगायें ,नेह भींगे गीत गायें; चाहते हैं गीत गाते ही रहें फिर रीत जायें; यह कि तब पछतायगी अपनी विवशता पर प्रलय भी| मत रहे तब झोपड़ी मिट जय फिर नीलम निलय भी!

इति

Bhawani Prasad Mishra

The Poet

भवानीप्रसाद मिश्र

Bhawani Prasad Mishra

Goddess Kali

Paired Painting

Goddess Kali

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Pralaya carries.