
कुछ सूखे फूलों के
Kuchh Sukhe Phoolon Ke
Bhawani Prasad Mishra
5 verses · ~8 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Naye Arth Ki Pyas Mein
Bhawani Prasad Mishra6 verses · ~1 min
नये अर्थ की प्यास में डूब गया शब्द मन का गोताख़ोर डूब गया उभरकर भँवर में अविश्वास के
हुआ ही कुछ तो यह हुआ कि उमड़ लिये धारा के ऊपर–ऊपर संदर्भों के घन और फिर वे भी झंझावत में उड़ गये
बरस लिये शायद जाकर किन्हीं अनजाने मैदानों में
और छू गई अगर आकर ठंडी हवा उन प्रांतरों की तो छटपटाये नये अर्थों के लिए डूबे–डूबे शब्द छूकर ठंडी हवा
पानी की लकीरें बनकर रह गये डूबे–उभरे शब्द
सन्दर्भों भरी भँवरी से वापिस ही नहीं हुए मोती के लिए ताल तक पैठे हुए मछुए!
इति

Paired Painting
At The Bath
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Naye Arth Ki Pyas Mein carries.