№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Lord Ganesha Writing

Shanta

कवि

Kavi

Bhawani Prasad Mishra
2 min read 2 versesकलमpenकवि

2 verses · ~2 min

कलम अपनी साध और मन की बात बिलकुल ठीक कह एकाध यह कि तेरी-भर न हो तो कह, और बहते बने सादे ढंग से तो बह. जिस तरह हम बोलते हैं, उस तरह तू लिख, और इसके बाद भी हमसे बड़ा तू दिख. चीज़ ऐसी दे कि स्वाद सर चढ़ जाये बीज ऐसा बो कि जिसकी बेल बन बढ़ जाये. फल लगें ऐसे कि सुख रस, सार और समर्थ प्राण-संचारी कि शोभा-भर न जिनका अर्थ.

टेढ़ मत पैदा करे गति तीर की अपना, पाप को कर लक्ष्य कर दे झूठ को सपना. विन्ध्य, रेवा, फूल, फल, बरसात या गरमी, प्यार प्रिय का, कष्ट-कारा, क्रोध या नरमी, देश या कि विदेश, मेरा हो कि तेरा हो.. हो विशेद विस्तार, चाहे एक घेरा हो, तू जिसे छु दे दिशा दिशा कल्याण हो उसकी, तू जिसे गा दे सदा वरदान हो उसकी.

इति

Bhawani Prasad Mishra

The Poet

भवानीप्रसाद मिश्र

Bhawani Prasad Mishra

Lord Ganesha Writing

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Lord Ganesha Writing

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kavi carries.