
जूही ने प्यार किया
Juhi Ne Pyar Kiya
Bhawani Prasad Mishra
2 verses · ~11 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Dharti Ka Pehla Premi
Bhawani Prasad Mishra12 verses · ~2 min
एडिथ सिटवेल ने सूरज को धरती का पहला प्रेमी कहा है
धरती को सूरज के बाद और शायद पहले भी तमाम चीज़ों ने चाहा
जाने कितनी चीज़ों ने उसके प्रति अपनी चाहत को अलग-अलग तरह से निबाहा
कुछ तो उस पर वातावरण बनकर छा गए कुछ उसके भीतर समा गए कुछ आ गए उसके अंक में
मगर एडिथ ने उनका नाम नहींलिया ठीक किया मेरी भी समझ में
प्रेम दिया उसे तमाम चीज़ों ने मगर प्रेम किया सबसे पहले उसे सूरज ने
प्रेमी के मन में प्रेमिका से अलग एक लगन होती है एक बेचैनी होती है एक अगन होती है सूरज जैसी लगन और अगन धरती के प्रति और किसी में नहीं है
चाहते हैं सब धरती को अलग-अलग भाव से उसकी मर्ज़ी को निबाहते हैं खासे घने चाव से
मगरप्रेमी में एक ख़ुदगर्ज़ी भी तो होती है देखता हूँ वह सूरज में है
रोज़ चला आता है पहाड़ पार कर के उसके द्वारे और रुका रहता है दस-दस बारह-बारह घंटों
मगर वह लौटा देती है उसे शाम तक शायद लाज के मारे
और चला जाता है सूरज चुपचाप टाँक कर उसकी चूनरी में अनगिनत तारे इतनी सारी उपेक्षा के बावजूद।
इति

Paired Painting
Urvashi and Pururavas in the Forest
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Dharti Ka Pehla Premi carries.