
इतने बहुत–से वसंत का
Itne Bahut Se Vasant Ka
Bhawani Prasad Mishra
3 verses · ~5 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
चिकने लम्बे केश काली चमकीली आँखें खिलते हुए फूल के जैसा रंग शरीर का फूलों ही जैसी सुगंध शरीर की समयों के अंतराल चीरती हुई अधीरता इच्छा की याद आती हैं ये सब बातें अधैर्य नहीं जागता मगर अब इन सबके याद आने पर
न जागता है कोई पश्चाताप जीर्णता के जीतने का शरीर के इस या उस वसंत के बीतने का
दुःख नहीं होता उलटे एक परिपूर्णता -सी मन में उतरती है
जैसे मौसम के बीत जाने पर दुःख नहीं होता उस मौसम के फूलों का!
इति

Paired Painting
Malabar Beauty
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Chikne Lambe Kesh carries.