
अच्छा अनुभव
Achha Anubhav
Bhawani Prasad Mishra
7 verses · ~16 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Aaram Se Bhai Zindagi
Bhawani Prasad Mishra6 verses · ~1 min
आराम से भाई ज़िन्दगी ज़रा आराम से तेज़ी तुम्हारे प्यार की बर्दाशत नहीं होती अब इतना कसकर किया आलिंगन ज़रा ज़्यादा है जर्जर इस शरीर को
आराम से भाई ज़िन्दगी ज़रा आराम से तुम्हारे साथ-साथ दौड़ता नहीं फिर सकता अब मैं ऊँची-नीची घाटियों पहाड़ियों तो क्या महल-अटारियों पर भी
न रात-भर नौका विहार न खुलकर बात-भर हँसना बतिया सकता हूँ हौले-हल्के बिल्कुल ही पास बैठकर
और तुम चाहो तो बहला सकती हो मुझे जब तक अँधेरा है तब तक सब्ज़ बाग दिखलाकर
जो हो जाएँगे राख छूकर सवेरे की किरन
सुबह हुए जाना है मुझे आराम से भाई ज़िन्दगी ज़रा आराम से ।
इति

Paired Painting
Parwati and the Priest
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Aaram Se Bhai Zindagi carries.