
महारथी
Maharathi
Bhawani Prasad Mishra
8 verses · ~11 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

5 verses · ~1 min
तापित को स्निग्ध करे, प्यासे को चैन दे; सूखे हुए अधरों को फिर से जो बैन दे ऐसा सभी पानी है|
लहरों के आने पर, काई-सा फटे नहीं; रोटी के लालच मे तोते-सा रटे नहीं प्राणी वही प्राणी है|
लँगड़े को पाँव और लूले को हाथ दे, सत की संभार में मरने तक साथ दे, बोले तो हमेशा सच, सच से हटे नहीं; झूट के डराए से हरगिज डरे नहीं| सचमुच वही सच्चा है|
माथे को फूल जैसा अपने को चढ़ा दे जो; रूकती-सी दुनिया को आगे बढा दे जो; मरना वही अच्छा है|
प्राणी का वैसे और दुनिया मे टोटा नहीं, कोई प्राणी बड़ा नहीं कोई प्राणी छोटा नहीं|
इति

Paired Painting
Nasik Scene (III of IV)
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Asadharan carries.