
आराम से भाई ज़िन्दगी
Aaram Se Bhai Zindagi
Bhawani Prasad Mishra
6 verses · ~13 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

7 verses · ~1 min
मेरे बहुत पास मृत्यु का सुवास देह पर उस का स्पर्श मधुर ही कहूँगा उस का स्वर कानों में भीतर मगर प्राणों में जीवन की लय तरंगित और उद्दाम किनारों में काम के बँधा प्रवाह नाम का
एक दृश्य सुबह का एक दृश्य शाम का दोनों में क्षितिज पर सूरज की लाली
दोनों में धरती पर छाया घनी और लम्बी इमारतों की वृक्षों की देहों की काली
दोनों में कतारें पंछियों की चुप और चहकती हुई दोनों में राशियाँ फूलों की कम-ज्यादा महकती हुई
दोनों में एक तरह की शान्ति एक तरह का आवेग आँखें बन्द प्राण खुले हुए
अस्पष्ट मगर धुले हुऐ कितने आमन्त्रण बाहर के भीतर के कितने अदम्य इरादे कितने उलझे कितने सादे
अच्छा अनुभव है मृत्यु मानो हाहाकार नहीं है कलरव है!
इति

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Achha Anubhav carries.