№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Portrait of Sadriddin Ainy

Shanta

चंद शेर

Chand Sher

Bashir Badr
2 min read 11 versesयादmemoryदुश्मनी

11 verses · ~2 min

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये ।

ज़िन्दगी तूने मुझे कब्र से कम दी है ज़मीं पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है ।

जी बहुत चाहता है सच बोलें क्या करें हौसला नहीं होता ।

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुँजाइश रहे जब कभी हम दोस्त हो जायें तो शर्मिन्दा न हों ।

एक दिन तुझ से मिलनें ज़रूर आऊँगा ज़िन्दगी मुझ को तेरा पता चाहिये ।

इतनी मिलती है मेरी गज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मेरा महबूब समझते होंगे ।

वो ज़ाफ़रानी पुलोवर उसी का हिस्सा है कोई जो दूसरा पहने तो दूसरा ही लगे ।

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलानें में।

पलकें भी चमक जाती हैं सोते में हमारी, आँखों को अभी ख्वाब छुपाने नहीं आते ।

तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड़ आया था. फिर उस के बाद मुझे कोई अजनबी नहीं मिला ।

मैं इतना बदमुआश नहीं यानि खुल के बैठ चुभने लगी है धूप तो स्वेटर उतार दे ।

इति

Bashir Badr

The Poet

बशीर बद्र

Bashir Badr

Portrait of Sadriddin Ainy

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Portrait of Sadriddin Ainy

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Chand Sher carries.