№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Gypsies

Karuna

द्वार पर साँकल लगाकर सो गए

Dwar Par Sankal Lagakar So Gaye

Ashok Anjum
1 min read 9 versesनींदsleepग़ज़ल

9 verses · ~1 min

द्वार पर साँकल लगाकर सो गए जागरण के गीत गाकर सो गए।

सोचते थे हम कि शायद आयेंगे और वे सपने सजाकर सो गए।

काश! वे सूरत भी अपनी देखते आइना हमको दिखाकर सो गए।

रूठना बच्चों का हर घर में यही पेट खाली छत पर जाकर सो गए।

हैं मुलायम बिस्तरों पर करवटें और भी धरती बिछाकर सो गए।

रात-भर हम करवटें लेते रहे और वे मुँह को घुमाकर सो गए।

घर के अंदर शोर था, हाँ इसलिए साब जी दफ्तर में आकर सो गए।

कितनी मुश्किल से मिली उनसे कहो वे जो आज़ादी को पाकर सो गए।

फिर गज़ल का शे'र हो जाता, मगर शब्द कुछ चौखट पे आकर सो गए।

इति

Ashok Anjum

The Poet

अशोक अंजुम

Ashok Anjum

Gypsies

Paired Painting

Gypsies

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Dwar Par Sankal Lagakar So Gaye carries.