
कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये
Kahan To Tay Tha Charaghan Har Ek Ghar Ke Liye
Dushyant Kumar
6 verses · ~11 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Karuna
Cheethde Mein Hindustan
Dushyant Kumar7 verses · ~1 min
एक गुडिया की कई कठपुतलियों में जान है, आज शायर ये तमाशा देख कर हैरान है।
ख़ास सड़कें बंद हैं तब से मरम्मत के लिए, यह हमारे वक्त की सबसे सही पहचान है।
एक बूढा आदमी है मुल्क में या यों कहो, इस अँधेरी कोठारी में एक रौशनदान है।
मस्लहत-आमेज़ होते हैं सियासत के कदम, तू न समझेगा सियासत, तू अभी नादान है।
इस कदर पाबंदी-ए-मज़हब की सदके आपके जब से आज़ादी मिली है, मुल्क में रमजान है।
कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए, मैंने पूछा नाम तो बोला की हिन्दुस्तान है।
मुझमें रहते हैं करोड़ों लोग चुप कैसे रहूँ, हर ग़ज़ल अब सल्तनत के नाम एक बयान है।
इति

Paired Painting
Shivaji Maharaj at Agra
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Cheethde Mein Hindustan carries.