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Shakuntala Looking for Dushyanta

KarunaIntermediate

कहानी

Kahani

Anjana Bhatt
3 min read 10 versesJourneyDestinyLife

10 verses · ~3 min

वो आया मेरा मन कुछ भरमाया इससे पहले कि मै कुछ सोचती अपने मन को टटोलती या कुछ सपने बुनती अचानक पाया कि वो तो था सिर्फ एक साया.

सालों बीते जिन्दगी ने एक दिन फिर सामने ला खड़ा किया मैने हैरानी से पलकें झपकाईं तो उसे उसके जीवन साथी के संग पाया, और वो? कुछ नया नया सा... हालांकि पुरुष था, फिर भी कुछ शर्माता सा पेश आया.

मैं अचानक नींद से जागी सब उमीदें जैसे पर लगा कर भागीं और मैं जिन्दी के पथरीले धरातल पर आ खड़ी हुई. तो अब? अब आगे बदना होगा खुद ही खुद को संभाल कर नई राहें तलाश करने को चलना होगा.

मैं चलती रही कुछ राहें बनती रहीं, कुछ मैं बनाती रही वो भी चलता रहा पुरुष था ना, उसके लिये राहें आसानी से खुलती रहीं सालों पर सालों की परतें जमती रहीं.

एक दिन फिर मिले वो ही पुरानी बातें.....पुराने शिकवे गिले मेरे सपनों की रानी थीं तुम क्यों तब कुछ नहीं बोलीं थीं तुम? आज भी तुम्हें पूजता हूँ. काश...तुम्हारा हाथ थाम कर चला होता तो सफ़र कुछ अलग अंदाज में ढला होता.

मैं फिर हैरान परेशान...... वापिस मन की गहराईयों में उतरी अपने वर्त्तमान की ऊचाईयों नीचाईयों में भटकी शायद अभी भी कुछ था जो कसमसाता था, सवाल करता था कि ये ना होता तो क्या होता? वैसा होता तो क्या अच्छा होता? सवाल तो बहुत थे पर जवाब कुछ ना आया.

फिर एक दिन जाना कि वो मौत से वाबस्ता था मेरा मन ना रोता था ना हँसता था फिर भी ना जाने क्यों यूँ ही पल पल तड़पता था.

आखिर आ खड़ी हुई परम पिता ईश्वर के द्वारे माँगी दुआएं, और बांधी हर ठिकाने मन्नती धागों की कतारें. जाने मेरे धागे पक्के थे या फिर मेरी दुआएं सच्चीं या फिर था बस एक बहाना.... वो मौत के दरवाज़े से खुदा के रहमों करम में लिपटा लौट आया.

जिन्दगी की रफ़्तार बहुत भारी है वो ही दस्तूर अब फिर से ज़ारी है अब ना कोई खबर आती है ना जाती है मगर इतना जानती हूँ कि आजकल वो फिर से हँसता बसता है पर हाँ....अब फिर से उसका और मेरा अलग अलग रास्ता है.

क्या करें? खुदा के बन्दे हर नए मोड़ पर एक नया रास्ता तलाशते हैं.. और फिर.. जिन्दगी के सफ़र तो बस अपने अपने ठिकानों पर ही जँचते हैं.

इति

Anjana Bhatt

The Poet

अंजना भट्ट

Anjana Bhatt

Shakuntala Looking for Dushyanta

Paired Painting

Shakuntala Looking for Dushyanta

This profound canvas immortalizes a poignant moment from the ancient Mahabharata, captured through the brilliant lens of master painter Raja Ravi Varma. Shakuntala, the ethereal heroine, pauses in a lush forest path, her body turned away while her head pivots gracefully back to catch one last glimpse of King Dushyanta. Her companions, rendered with gentle warmth and affectionate smiles, watch her subtle hesitation with knowing tenderness. In the background, a silent figure in ochre robes softly traverses the sacred grove, grounding the mythical encounter in a timeless spiritual atmosphere. Varma brilliantly marries classical Indian theatricality with Western realism, breathing vibrant life into Kalidasa,s immortal poetic drama.

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