
ख़्वाब ही था ज़िन्दगी कितनी सहल हो जायेगी
Khwab Hi Tha Zindagi Kitni Sahal Ho Jayegi
Amitabh Tripathi ‘Amit’
5 verses · ~10 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
Loading the archive
MM · XXVI

10 verses · ~4 min
वो आया मेरा मन कुछ भरमाया इससे पहले कि मै कुछ सोचती अपने मन को टटोलती या कुछ सपने बुनती अचानक पाया कि वो तो था सिर्फ एक साया.
सालों बीते जिन्दगी ने एक दिन फिर सामने ला खड़ा किया मैने हैरानी से पलकें झपकाईं तो उसे उसके जीवन साथी के संग पाया, और वो? कुछ नया नया सा... हालांकि पुरुष था, फिर भी कुछ शर्माता सा पेश आया.
मैं अचानक नींद से जागी सब उमीदें जैसे पर लगा कर भागीं और मैं जिन्दी के पथरीले धरातल पर आ खड़ी हुई. तो अब? अब आगे बदना होगा खुद ही खुद को संभाल कर नई राहें तलाश करने को चलना होगा.
मैं चलती रही कुछ राहें बनती रहीं, कुछ मैं बनाती रही वो भी चलता रहा पुरुष था ना, उसके लिये राहें आसानी से खुलती रहीं सालों पर सालों की परतें जमती रहीं.
एक दिन फिर मिले वो ही पुरानी बातें.....पुराने शिकवे गिले मेरे सपनों की रानी थीं तुम क्यों तब कुछ नहीं बोलीं थीं तुम? आज भी तुम्हें पूजता हूँ. काश...तुम्हारा हाथ थाम कर चला होता तो सफ़र कुछ अलग अंदाज में ढला होता.
मैं फिर हैरान परेशान...... वापिस मन की गहराईयों में उतरी अपने वर्त्तमान की ऊचाईयों नीचाईयों में भटकी शायद अभी भी कुछ था जो कसमसाता था, सवाल करता था कि ये ना होता तो क्या होता? वैसा होता तो क्या अच्छा होता? सवाल तो बहुत थे पर जवाब कुछ ना आया.
फिर एक दिन जाना कि वो मौत से वाबस्ता था मेरा मन ना रोता था ना हँसता था फिर भी ना जाने क्यों यूँ ही पल पल तड़पता था.
आखिर आ खड़ी हुई परम पिता ईश्वर के द्वारे माँगी दुआएं, और बांधी हर ठिकाने मन्नती धागों की कतारें. जाने मेरे धागे पक्के थे या फिर मेरी दुआएं सच्चीं या फिर था बस एक बहाना.... वो मौत के दरवाज़े से खुदा के रहमों करम में लिपटा लौट आया.
जिन्दगी की रफ़्तार बहुत भारी है वो ही दस्तूर अब फिर से ज़ारी है अब ना कोई खबर आती है ना जाती है मगर इतना जानती हूँ कि आजकल वो फिर से हँसता बसता है पर हाँ....अब फिर से उसका और मेरा अलग अलग रास्ता है.
क्या करें? खुदा के बन्दे हर नए मोड़ पर एक नया रास्ता तलाशते हैं.. और फिर.. जिन्दगी के सफ़र तो बस अपने अपने ठिकानों पर ही जँचते हैं.
इति
The Poet
Anjana Bhatt
1953 · 1990s
Anjana Bhatt is a compelling voice in contemporary Hindi poetry who writes with profound emotional vulnerability. Born in 1957 in New Delhi, her work primarily navigates the intricate architecture of human relationships, domestic life, and the quiet sacrifices inherent in motherhood. She does not rely on complex literary structures. Instead, she brings the raw realities of everyday existence to the forefront of her verses. Poems like Bolo Maa and Dulhan Ka Singaar resonate deeply with readers because they articulate the unspoken fears and longings of the ordinary woman. She has cultivated a dedicated following through prominent literary platforms and literary journals, ensuring that the female experience is documented with empathy and clarity. Bhatt stands as a poet of genuine resilience, offering comfort and recognition to those who often feel overlooked by mainstream literary narratives.

Paired Painting
Shakuntala Looking for Dushyanta
Open the viewer →
If this held you
Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kahani carries.