№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Sairandhri

Karuna

बहुत सहज हो जाते के भी अपने ख़तरे हैं

Bahut Sahaj Ho Jaate Ke Bhi Apne Khatre Hain

Amitabh Tripathi ‘Amit’
1 min read 7 versesसहजsimpleराजनीति

7 verses · ~1 min

बहुत सहज हो जाने के भी अपने ख़तरे हैं लोग समझने लगते हैं हम गूँगे-बहरे हैं

होरी को क्या पता नहीं, उसकी बदहाली से काले ग्रेनाइट पर कितने हर्फ़ सुनहरे हैं

धड़क नहीं पाता मेरा दिल तेरी धड़कन पर मंदिर-मस्ज़िद-गुरुद्वारों के इतने पहरे हैं

पढ़-लिख कर मंत्री हो पाये, बिना पढ़े राजा जाने कब से राजनीति के यही ककहरे हैं

निष्ठा को हर रोज़ परीक्षा देनी होती है अविश्वास के घाव दिलों में इतने गहरे हैं

मैं रोया तो नहीं नम हुई हैं फिर भी आंखें और किसी के आँसू इन पलकों पर ठहरे हैं

बौनो की आबादी में है कद पर पाबन्दी उड़ने लायक सभी परिन्दो के पर कतरे हैं

इति

Amitabh Tripathi ‘Amit’

The Poet

अमिताभ त्रिपाठी 'अमित'

Amitabh Tripathi ‘Amit’

Sairandhri

Paired Painting

Sairandhri

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Bahut Sahaj Ho Jaate Ke Bhi Apne Khatre Hain carries.