
जिन्दगी इक तलाश है क्या है?
Zindagi Ik Talash Hai Kya Hai?
Amitabh Tripathi ‘Amit’
8 verses · ~12 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Aham Ki Odh Kar Chadar
Amitabh Tripathi ‘Amit’3 verses · ~1 min
अहम की ओढ़ कर चादर फिरा करते हैं हम अक्सर
अहम अहमों से टकराते बिखरते चूर होते हैं मगर फिर भी अहम के हाथ हम मजबूर होते हैं अहम का एक टुकड़ा भी नया आकार लेता है ये शोणित बीज का वंशज पुनः हुंकार लेता है अहम को जीत लेने का अहम पलता है बढ़-चढ़ कर अहम की ओढ़ कर .....
विनय शीलो में भी अपनी विनय का अहम होता है वो अन्तिम साँस तक अपनी वहम का अहम ढोता है अहम ने देश बाँटॆ हैं अहम फ़िरकों का पोषक है अहम इंसान के ज़ज़्बात का भी मौन शोषक है अहम पर ठेस लग जाये कसक रहती है जीवन भर अहम की ओढ़ करे चादर ...
इति

Paired Painting
Dark and difficult was the Road
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Aham Ki Odh Kar Chadar carries.