
देह के मस्तूल
Deh Ke Mastool
Chandrasen Virat
4 verses · ~8 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
किसी के स्पर्शों से मेरी देह सब पाटल-पाटल है ।
प्राण में जली प्रणय की लौ काम्य कौमार्य कपूर हुआ, आरती श्वास, रोम अक्षत लाज का स्वर सिन्दूर हुआ, प्यार की पूजा के पल में समर्पित तन-तुलसीदल है ।
प्रणय-पुष्पों की गंध लिए साँस के सार्थवाह निकले, गीत गंधर्वी आत्मा से पूर्ण करके विवाह निकले, वृत्ति अब जैसे वंशी है, मर्म अब जैसे मादल है ।
देह की शिरा-शिरा गोपी गूँजता मन-वृन्दावन है, मग्न है महारास में सब ब्रह्मसुख पाने का क्षण है । हृदय के श्याम व्यथाकुल हैं, प्रीति की राधा विह्वल है ।
इति

Paired Painting
Krishna Embracing Radha
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Patal-Patal Hai carries.