№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Karna and Kunti

Karuna

अपने दुखड़े

Apne Dukhde

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'
2 min read 8 versesदुखsorrowजाति

8 verses · ~2 min

देश को जिस ने जगाया जगे सोने न दिया। आग घर घर में बुरी फूट को बोने न दिया।1।

है वही बीर पिया दूध उसी ने माँ का। जाति को जिसने जिगर थाम के रोने न दिया।2।

बन गये भोले बहुत, अपनी भलाई भूली। है इसी भूल ने अब तक भला होने न दिया।3।

बार से कैसे दुखों के न भला दब जाते। ऐब अपना हमें अदबार ने खोने न दिया।4।

किस तरह बात बने क्यों न दबा अनबन ले। प्यार का बोझ बनावट ने तो ढोने न दिया।5।

हो सके मेल क्यों हम कैसे गले मिल पावें। मैल जी का बुरे मैलान ने खोने न दिया।6।

तो किसी काम की रंगत न रही जो उसने। भाव रंगों में उमंगों को भिगोने न दिया।7।

लाल माई का हमें लोग कहेंगे कैसे। प्रेम आँसू ने अगर मोती पिरोने न दिया।8।

इति

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

The Poet

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

Karna and Kunti

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Karna and Kunti

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Apne Dukhde carries.