
दिल के फफोले -1
Dil Ke Phaphole - 1
Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'
10 verses · ~46 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

8 verses · ~2 min
देश को जिस ने जगाया जगे सोने न दिया। आग घर घर में बुरी फूट को बोने न दिया।1।
है वही बीर पिया दूध उसी ने माँ का। जाति को जिसने जिगर थाम के रोने न दिया।2।
बन गये भोले बहुत, अपनी भलाई भूली। है इसी भूल ने अब तक भला होने न दिया।3।
बार से कैसे दुखों के न भला दब जाते। ऐब अपना हमें अदबार ने खोने न दिया।4।
किस तरह बात बने क्यों न दबा अनबन ले। प्यार का बोझ बनावट ने तो ढोने न दिया।5।
हो सके मेल क्यों हम कैसे गले मिल पावें। मैल जी का बुरे मैलान ने खोने न दिया।6।
तो किसी काम की रंगत न रही जो उसने। भाव रंगों में उमंगों को भिगोने न दिया।7।
लाल माई का हमें लोग कहेंगे कैसे। प्रेम आँसू ने अगर मोती पिरोने न दिया।8।
इति
The Poet
Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

Paired Painting
Karna and Kunti
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Apne Dukhde carries.