№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Death of Jatayu

Karuna

लानतान

Lantan

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'
2 min read 10 versesलानतानreproachदुख

10 verses · ~2 min

गयीं चोटें लगाई क्या कलेजा चोट खाता है। कलेजा कढ़ रहा है क्या कलेजा मुँह को आता है।1।

हुए अंधेर कितने आज भी अंधेर हैं होते। अँधेरा आँख पर छाया है अंधापन न जाता है।2।

रहा कुछ भी न परदा बेतरह हैं खुल रहे परदे। हमारी आँख का परदा उठाये उठ न पाता है।3।

हुए बदरंग, सारी रंगते हैं धूल में मिलतीं। मगर अब भी हमारा रंग-बिगड़ा रंग में लाता है।4।

खुलीं आँखें न खोले पुतलियाँ हैं आँख की कढ़ती। मगर लहू हमारी आँख से अब भी न आता है।5।

न आँखें देखने पाईं न आँखों में लहू उतरा। वही है लुट रहा जो आँख का तारा कहाता है।6।

पुँछे आँसू न बेवों के न हैं वे बेबहा मोती। बहे आँसू न वह सब जाति ही को जो बहाता है।7।

घटे ही जा रहे हैं हम घटी पर है घटी होती। लहू का घूँट पीना बेतरह हम को घटाता है।8।

समय की आँख देखें आँख पहचानें समय की हम। गिरे वे आँख से जिन को समय आँखें दिखाता है।9।

सदा बेजान मरते हैं जियेंगे जान वाले ही। गया वह, जान रहते जान अपनी जो गँवाता है।10।

इति

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

The Poet

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

Death of Jatayu

Paired Painting

Death of Jatayu

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Lantan carries.