
ऐ बादल!
Ae Baadal!
Shriprakash Shukla
5 verses · ~10 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
Loading the archive
MM · XXVI

14 verses · ~3 min
शाम के वक़्त लोग जब अपने अपने अड्डों केा जाते हैं काशी अपने अंधेरे में चली जाती है
काशी का अपने अंधेरे में जाना अंधेरे में काशी का होना है जहां जीवन की आहट मिलती है और ज्ञानी अपना ज्ञान बघारता है
अंधेरे में काशी उजाले के काशी से ज़्यादा खूबसूरत है और मादक भी
यह अंधेरे में मचलती है और मिचलती भी जहाँ दर्द है और प्रसव भी
अंधेरे में काशी अपलक निहारती रहती है ग्राहक टिकठी की तरह तनी हुई
कभी यह अलसाई हुई खूबसूरत नायिका है तो कभी हंकारती हुयी नागिन और इन दोनों के बीच उसका विस्तार वही महाशमशान होता है जिसकी ज्योति कभी बुझने नही पाती
इसकी हर घाटों में थिरकन है और थकान भी करीब-करीब उस बूढे़ की तरह जो हर शाम घर से नाराज़ होकर निकल जाता है अपनी जवानी की खोज में
अंधेरे में यह शव है उजाले में पाखंड
अंधेरे में काशी को समझना हो तो गंगा के ठीक बीचो-बीच चले जाइये
काशी लगातार उभर रही होती है सूरज लगातार डूब रहा होता है
काशी में चीज़ें अंधेरे में आती हैं जैसे अंधेरे में आते हैं विचार अंधेरे में आता है दूध अंधेरे में आता है प्रेम
अंधेरे में काशी एक तरफ से उठती है तो दूसरी तरफ से सिकुड़ रही होती है
काशी का यह उठना और सिकुड़ना काशी का अंधेरे में चलना है एक ऐसे उजाले की तलाश में जहाँ गैर अज़ निगाह कोई हाईल नही रहता ।
रचनाकाल: अक्टूबर 2007
इति

Paired Painting
Rajrajeswuree Ghat, Benares
Open the viewer →
If this held you
Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Andhere Mein Kashi carries.