№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Rajrajeswuree Ghat, Benares

Shanta

अंधेरे में काशी

Andhere Mein Kashi

Shriprakash Shukla
3 min read 14 versesकाशीKashiअंधेरा

14 verses · ~3 min

शाम के वक़्त लोग जब अपने अपने अड्डों केा जाते हैं काशी अपने अंधेरे में चली जाती है

काशी का अपने अंधेरे में जाना अंधेरे में काशी का होना है जहां जीवन की आहट मिलती है और ज्ञानी अपना ज्ञान बघारता है

अंधेरे में काशी उजाले के काशी से ज़्यादा खूबसूरत है और मादक भी

यह अंधेरे में मचलती है और मिचलती भी जहाँ दर्द है और प्रसव भी

अंधेरे में काशी अपलक निहारती रहती है ग्राहक टिकठी की तरह तनी हुई

कभी यह अलसाई हुई खूबसूरत नायिका है तो कभी हंकारती हुयी नागिन और इन दोनों के बीच उसका विस्तार वही महाशमशान होता है जिसकी ज्योति कभी बुझने नही पाती

इसकी हर घाटों में थिरकन है और थकान भी करीब-करीब उस बूढे़ की तरह जो हर शाम घर से नाराज़ होकर निकल जाता है अपनी जवानी की खोज में

अंधेरे में यह शव है उजाले में पाखंड

अंधेरे में काशी को समझना हो तो गंगा के ठीक बीचो-बीच चले जाइये

काशी लगातार उभर रही होती है सूरज लगातार डूब रहा होता है

काशी में चीज़ें अंधेरे में आती हैं जैसे अंधेरे में आते हैं विचार अंधेरे में आता है दूध अंधेरे में आता है प्रेम

अंधेरे में काशी एक तरफ से उठती है तो दूसरी तरफ से सिकुड़ रही होती है

काशी का यह उठना और सिकुड़ना काशी का अंधेरे में चलना है एक ऐसे उजाले की तलाश में जहाँ गैर अज़ निगाह कोई हाईल नही रहता ।

रचनाकाल: अक्टूबर 2007

इति

Shriprakash Shukla

The Poet

श्रीप्रकाश शुक्ल

Shriprakash Shukla

Rajrajeswuree Ghat, Benares

Paired Painting

Rajrajeswuree Ghat, Benares

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